Thursday, December 12, 2019
Friday, August 30, 2019
शेयर बाजार से रिलेटेड कुछ फुल फार्म्स
आप चाहे नौकरीपेशा हों,व्यापारी हों या शेयर मार्केट के ट्रेडर, सभी लोग कुछ फुल फॉर्म्स अक्सर सुनते-पढ़ते रहते हैं। ये फुल फॉर्म्स इतने कॉमन हैं कि रोज इनको प्रयोग में लाते-लाते हम इनके शार्ट फॉर्म के आदी हो चुके हैं और हम इनके विस्तृत रुप याद नहीं रखते। तो आज हम यहां आपकी स्मृति में सुप्त पड़े ऐसे ही कुछ बेहद कॉमन फुल फॉर्म्स के बारे में बता रहे हैं :
ALM - Asset Liability Management
ATM - Automated Teller Machine
BPLR - Benchmark Prime Lending Rate
CAD - Capital Account Deficit
CARE - Credit Analysis and Research Limited
CASA - Current and Saving Accounts
GNP - Gross National Product
HDFC - Housing Development Finance Corporation
ICICI - Industrial Development and Investment Corporation Of India
ICRA - Investment Information & Crexit Rating Agency
IFSC - Indian Financial System Code
INR - Indian Rupee
IRCTC - Indian Railways Catering and Tourism Corporation
NEFT - National Electronic Fund Transfer
NPA - NON Performing Assets
PIN - Personal Identification Number
PPP - Purchasing Power Parity/ Public Private PartenershP
PSB - Public Sector Bank
RTGS - REAL Time Gross Settlement
SLR - Statutory Liquidity Ratio
UPI - Unified Payment Interface
समय-समय पर आपको और भी फुल फॉर्म्स के बारे में बताएंगे।
ALM - Asset Liability Management
ATM - Automated Teller Machine
BPLR - Benchmark Prime Lending Rate
CAD - Capital Account Deficit
CARE - Credit Analysis and Research Limited
CASA - Current and Saving Accounts
GNP - Gross National Product
HDFC - Housing Development Finance Corporation
ICICI - Industrial Development and Investment Corporation Of India
ICRA - Investment Information & Crexit Rating Agency
IFSC - Indian Financial System Code
INR - Indian Rupee
IRCTC - Indian Railways Catering and Tourism Corporation
NEFT - National Electronic Fund Transfer
NPA - NON Performing Assets
PIN - Personal Identification Number
PPP - Purchasing Power Parity/ Public Private PartenershP
PSB - Public Sector Bank
RTGS - REAL Time Gross Settlement
SLR - Statutory Liquidity Ratio
UPI - Unified Payment Interface
समय-समय पर आपको और भी फुल फॉर्म्स के बारे में बताएंगे।
Saturday, May 18, 2019
Short Selling क्या होती है ?
शेयर मार्केट ऐसी जगह है जहां स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध शेयर्स की खरीदी-बिक्री होती है। आजकल NSE और BSE में प्रतिदिन लाखों करोड़ का टर्नओवर होता है। एक व्यक्ति शेयर खरीदता है तो दूसरा बेचता है। जिसे सीधे-सीधे Buying और Selling कहा जा सकता है।
Selling मतलब बेचना
Short मतलब कम करना
यानि आपने जो माल मार्केट से ख़रीदा उसको कम करना। Short Selling को short covering भी कहा जाता है। अक्सर न्यूज़ पेपर या TV पर यह देखने-पढ़ने को मिलता है कि आज अंतिम समय मे शार्ट कवरिंग होने के कारण शेयर बाजार में तेजी गई।
अब आइये जानते हैं शार्ट सैलिंग कैसे की जाती है ? शेयर मार्केट में जब किसी शेयर की कीमतें गिरने की आशंका हो तब short selling की जाती है।शेयर के भाव गिरने पर निवेशक को नुकसान होता है और मजेदार बात हे कि Short Selling करके शेयर की कीमत गिरने पर भी लाभ कमाया जा सकता है।यदि आपको सोमवार को लग रहा है कि आज TCS के शेयर में भारी गिरावट आ सकती है तो आप Short Selling करके बहुत मुनाफा कमा लेंगें।भाव गिरने की संभावना में पहले शेयर बेचे जाते हैं,भले ही आपके पास वो शेयर न भी हों और जब थोड़े समय बाद अचानक भाव गिर जाय तो फौरन वही शेयर खरीद लिए जाते हैं।
इसका एक उदाहरण : आज मुझे लगा कि TCS गिरेगा तो मैंने सवेरे मार्केट खुलते ही 50 शेयर 2000 रुपये के भाव से बेच दिए। हालाँकि मेरे पास TCS के शेयर्स नहीं थे। एक घण्टे बाद TCS गिरते-गिरते 1900 पर आ गया।मैंने फौरन 50 शेयर TCS के 1900 में खरीद लिए।
अब हिसाब बराबर हो गया।और मुझे 5000 रुपये का फायदा भी हो गया।
शेयर बेचे 2000 × 50 = 100000
शेयर ख़रीदे 1900 × 50 =95000
100000 -95000 = 5000
Short Selling करने के लिए आपके डी मेट खाते में शेयर्स होना जरूरी नहीं है। हो तो भाव गिरने पर आप चाहे तो वो शेयर बेच कर शार्ट सैलिंग कर सकते हैं।
शार्ट सैलिंग करते समय एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शाम को मार्केट बन्द होने के पहले आपको शेयर खरीद कर सौदा काटना अनिवार्य है।अन्यथा स्टॉक एक्सचेंज आपके ऊपर भारी फाईन लगा सकता है।
SHORT SELLING क्या होता है ?
शार्ट सैलिंग को आसान तरीके से याद रखना हो तो ऐसे याद रखिये -
Selling मतलब बेचना
Short मतलब कम करना
यानि आपने जो माल मार्केट से ख़रीदा उसको कम करना। Short Selling को short covering भी कहा जाता है। अक्सर न्यूज़ पेपर या TV पर यह देखने-पढ़ने को मिलता है कि आज अंतिम समय मे शार्ट कवरिंग होने के कारण शेयर बाजार में तेजी गई।
अब आइये जानते हैं शार्ट सैलिंग कैसे की जाती है ? शेयर मार्केट में जब किसी शेयर की कीमतें गिरने की आशंका हो तब short selling की जाती है।शेयर के भाव गिरने पर निवेशक को नुकसान होता है और मजेदार बात हे कि Short Selling करके शेयर की कीमत गिरने पर भी लाभ कमाया जा सकता है।यदि आपको सोमवार को लग रहा है कि आज TCS के शेयर में भारी गिरावट आ सकती है तो आप Short Selling करके बहुत मुनाफा कमा लेंगें।भाव गिरने की संभावना में पहले शेयर बेचे जाते हैं,भले ही आपके पास वो शेयर न भी हों और जब थोड़े समय बाद अचानक भाव गिर जाय तो फौरन वही शेयर खरीद लिए जाते हैं।
इसका एक उदाहरण : आज मुझे लगा कि TCS गिरेगा तो मैंने सवेरे मार्केट खुलते ही 50 शेयर 2000 रुपये के भाव से बेच दिए। हालाँकि मेरे पास TCS के शेयर्स नहीं थे। एक घण्टे बाद TCS गिरते-गिरते 1900 पर आ गया।मैंने फौरन 50 शेयर TCS के 1900 में खरीद लिए।
अब हिसाब बराबर हो गया।और मुझे 5000 रुपये का फायदा भी हो गया।
शेयर बेचे 2000 × 50 = 100000
शेयर ख़रीदे 1900 × 50 =95000
100000 -95000 = 5000
Short Selling करने के लिए आपके डी मेट खाते में शेयर्स होना जरूरी नहीं है। हो तो भाव गिरने पर आप चाहे तो वो शेयर बेच कर शार्ट सैलिंग कर सकते हैं।
शार्ट सैलिंग करते समय एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शाम को मार्केट बन्द होने के पहले आपको शेयर खरीद कर सौदा काटना अनिवार्य है।अन्यथा स्टॉक एक्सचेंज आपके ऊपर भारी फाईन लगा सकता है।
Sunday, February 17, 2019
ये हैं BSE सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियां
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE के प्रमुख बैंचमर्क इंडेक्स सेंसेक्स में देश की 30 कंपनियां शामिल हैं। मार्केट कैपिटल के हिसाब से इनकी रैंक इस प्रकार है :
(दिनांक 22-02-2019 के अनुसार)
क्रम कंपनी का नाम मार्केट कैपिटल (Rs करोड़ )
1. रिलायंस एंड लि RIL 7,81,146
2. टाटा कंसल्टेंसी TCS 7,22,578
3. एचडीएफसी बैंक 5,68,975
4. हिंदुस्तान यूनिलीवर लि 3,82,829
5. आईटीसी लि ITC 3,36,041
6. एचडीएफसी लि 3,24,630
7. इंफोसिस लि 3,21,074
8. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया लि 2,41,812
9. कोटक महिंद्रा बैंक लि 2,36,195
10.आईसीआईसीआई बैंक 2,26,828
11. मारुति लि 2,08,810
12. एक्सिस बैंक लि 1,80,457
13. ओएनजीसी लि 1,90,702
14. एल & टी लि 1,79,533
15. बजाज फाइनेंस लि 1,52,607
16. एचसीएल टेक लि 1,44,598
17. एशियन पैंट्स लि 1,34,077
18. कोल इंडिया लि 1,33,428
19. भारती एयरटेल लि 1,25,458
20. एनटीपीसी लि 1,15,189
21. सन फार्मा लि 1,03,291
22. पॉवर ग्रिड लि 95,163
23. इंडस इंड बैंक लि 88,151
24. बजाज ऑटो लि 81,570
25. महिंद्रा एंड महिंद्रा लि 80,385
26. टाटा स्टील लि 60,483
27. वेदांत लि 63,062
28. हीरो मोटो कॉर्प लि 53,523
29. टाटा मोटर्स लि 50,326
30. टाटा मोटर्स DVR लि 25,755
(दिनांक 22-02-2019 के अनुसार)
क्रम कंपनी का नाम मार्केट कैपिटल (Rs करोड़ )
1. रिलायंस एंड लि RIL 7,81,146
2. टाटा कंसल्टेंसी TCS 7,22,578
3. एचडीएफसी बैंक 5,68,975
4. हिंदुस्तान यूनिलीवर लि 3,82,829
5. आईटीसी लि ITC 3,36,041
6. एचडीएफसी लि 3,24,630
7. इंफोसिस लि 3,21,074
8. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया लि 2,41,812
9. कोटक महिंद्रा बैंक लि 2,36,195
10.आईसीआईसीआई बैंक 2,26,828
11. मारुति लि 2,08,810
12. एक्सिस बैंक लि 1,80,457
13. ओएनजीसी लि 1,90,702
14. एल & टी लि 1,79,533
15. बजाज फाइनेंस लि 1,52,607
16. एचसीएल टेक लि 1,44,598
17. एशियन पैंट्स लि 1,34,077
18. कोल इंडिया लि 1,33,428
19. भारती एयरटेल लि 1,25,458
20. एनटीपीसी लि 1,15,189
21. सन फार्मा लि 1,03,291
22. पॉवर ग्रिड लि 95,163
23. इंडस इंड बैंक लि 88,151
24. बजाज ऑटो लि 81,570
25. महिंद्रा एंड महिंद्रा लि 80,385
26. टाटा स्टील लि 60,483
27. वेदांत लि 63,062
28. हीरो मोटो कॉर्प लि 53,523
29. टाटा मोटर्स लि 50,326
30. टाटा मोटर्स DVR लि 25,755
Sunday, January 6, 2019
म्यूच्यूअल फंड्स कितनी तरह के होते हैं ?
यदि आप सीधे शेयर मार्केट में पैसा न डाल कर mutual fund म्यूचुअल फंड (एमएफ) की किसी स्कीम में निवेश करना चाह रहे हैं ? अगर हां तो पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि म्यूचुअल फंड कितनी तरह के होते हैं.
आपको अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से सही म्यूचुअल फंड को चुनना चाहिए. आइए म्यूचुअल फंड की इन स्कीम के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.
संरचना और अवधि के हिसाब से MF कितने तरह के होते हैं ?
संरचना के हिसाब से म्यूचुअल फंड तीन तरह के होते हैं:
आपको अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से सही म्यूचुअल फंड को चुनना चाहिए. आइए म्यूचुअल फंड की इन स्कीम के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.
संरचना और अवधि के हिसाब से MF कितने तरह के होते हैं ?
संरचना के हिसाब से म्यूचुअल फंड तीन तरह के होते हैं:
1.ओपन एंडेड स्कीम
आप इस तरह की म्यूचुअल फंड स्कीम में किसी भी वक्त निवेश कर सकते हैं. ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश को किसी समय भुनाया जा सकता है. इस स्कीम की NAV (नेट एसेट वैल्यू) पर ही इसे खरीदा-बेचा जा सकता है. इस तरह की MF स्कीम में निवेश करने पर आपको अलग से चार्ज देना पड़ता है.
2.क्लोज्ड एंडेड स्कीम
कई बार म्यूचुअल फंड कंपनियां क्लोज्ड एंडेड स्कीम लांच करती हैं. इस तरह की MF स्कीम में आप निर्धारित अवधि में ही निवेश कर सकते हैं. अगर आप क्लोज्ड एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं तो आप इसे मैच्योरिटी के बाद ही भुना सकते हैं.3. इंटरवल स्कीम
म्यूचुअल फंड की इस तरह की स्कीम फंड प्रबंधन की अवधि में दोबारा खरीदी जा सकती है. वास्तव में इंटरवल स्कीम में ओपन और क्लोज्ड एंडेड, दोनों स्कीम की सुविधा होती है.म्यूच्यूअल फंड द्वारा इकट्ठा की गई राशि कहां निवेश की जा रही है, इस आधार पर म्यूचअल फंड को 7 प्रकार के फंड्स में वर्गीकृत कर सकते हैं. इनके बारे में अधिक जानकारी इस तरह है :-
1. इक्विटी या ग्रोथ फंड -
ऐसे म्यूचअल फंड में निवेशकों का पैसा शेयर बाजार में डाला जाता है. इसमें लार्जकेप मिडकेप, स्मॉलकेप, ELSS, इंडेक्स फंड आदि प्रकार के इक्विटी फंड होते हैं. ऐसे म्यूचअल फंड में लगाया निवेश शेयर बाजार की चाल के हिसाब से निवेशकों को रिटर्न देता है. जाहिर है इस फंड में रिस्क बहुत है साथ ही ज्यादा लाभ होने के अवसर भी हैं.
2. फिक्स्ड इनकम या डेब्ट फंड -
ऐसे म्यूच्यूअल फंड सरकारी सेक्युरिटिस, बांड, डिबेंचर में राशि निवेश करते हैं. इन फंड्स में रिस्क न के बराबर होता है. इनसे प्राप्त होने वाला रिटर्न निश्चित होता है जैसे बैंक की एफडी.
3. हाइब्रिड फंड -
ऐसे फंड फिक्स्ड इनकम फंड व इक्विटी फंड दोनों को मिलाकर बनाये जाते हैं। अर्थात कुछ पैसा इक्विटी में लगाया जाता है और कुछ पैसा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है ताकि निवेशकों को जोखिम कम और लाभ ज्यादा मिले. आम तौर पर हायब्रिड फंड इक्विटी में कम निवेश करते है . हायब्रिड फंड वरिष्ठ नागरिकों व रिटायर्ड लोगों के लिए बहुत उपयुक्त हैं.
4. मनी मार्केट या लिक्विड फंड-
ऐसे फंड अपना पैसा बहुत कम अवधि वाले सरकारी इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते है. ऐसे व्यक्ति जिनको छोटी अवधि के लिए अपना पैसा सुरक्षित रखते हुए कहीं निवेश करना है, इन फंड्स में निवेश करते हैं,.
5. बैलेंस्ड फंड-
ऐसे फंड इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करते हैं. ऐसे फंड्स का उद्देश्य निवेशकों को कम जोखिम के साथ अधिक रिटर्न देना होता है. ये फंड्स उन लोगों के लिए ठीक हैं जो शेयर बाजार में सीधे निवेश करने से डरते हैं लेकिन डेट की अपेक्षा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं.
6. गिल्ट फंड-
ये फंड्स अपनी पूरी राशि सरकारी प्रतिभूतियों में लगाते है. ऐसे लोग जो बिल्कुल रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, इनमें निवेश करते हैं.
7. आर्बिट्रेज फंड-
ऐसे फंड्स अपनी राशि का 60 से 65 % भाग शेयर बाजार में लगाते हैं. ऐसे फंड्स में निवेश की गई राशि सुरक्षित तो रहती है लेकिन रिटर्न कम-ज्यादा होता रहता है.
ऐसे फंड्स को समझने हेतु आर्बिट्रेज क्या होता है,जानना जरूरी है.
मान लें किसी कम्पनी के शेयर का भाव कैश बाजार में 100 रुपये है,वहीं उसी शेयर का भाव डेरिवेटिव बाजार में, जहां भविष्य के लिए सौदे होते हैं 105 रुपये है. इन दोनों बाजार में एक शेयर के भाव मे अंतर 5 रुपये है. आर्बिट्रेज फंड ऐसे शेयर्स में निवेश करके लाभ कमाते हैं.
Wednesday, January 2, 2019
कॉल आप्शन और पुट आप्शन क्या हैं?
बाजार में कमाना चाहते हैं पैसा लेकिन वायदा बाजार की जटिलता से लगता है डर।तो यहां आसान भाषा में समझें ऑप्शन क्या होता है और कैसे इससे पैसा कमाया जा सकता है। इस पोस्ट में हम बता रहे हैं Option के बारे में।
Option शेयर को खरीदने-बेचने का अधिकार देता है। ऑप्शन की अवधि 1 सीरीज की होती है। ऑप्शन खरीदने के लिए प्रीमियम देना पड़ता है। ऑप्शन में मुनाफा असीमित और नुकसान सीमित होता है। ऑप्शन ज्यादा से ज्यादा नुकसान आपके प्रीमियम का होता है। उदाहरण के लिए निफ्टी 11000 कॉल में 6 रुपये की प्रीमियम दर से 75 के एक लॉट को खीदने की कामत होगी 6*75= 470 रुपये। अब निफ्टी क्रैश होने पर भी आपको ज्यादा से ज्यादा 470 रुपये का ही नुकसान होगा। वहीं, निफ्टी 11000 पहुंचा को प्रीमियम बढ़कर 40 रुपये से भी ज्यादा होना संभव है।
फ्यूचर्स और ऑप्शन में अंतर
फ्यूचर्स में नुकसान असीमित होता है। फ्यूचर्स में लॉट की पूरी कीमत का मार्जिन देना पड़ता है। वहीं, ऑप्शन में सिर्फ प्रीमियम देकर सौदा ले सकते हैं।
क्या होता है Call Option
कॉल ऑप्शन एक शेयर खरीदने का हक देता है। कॉल खरीदने का मतलब तेजी कर रहे हैं।
क्या होता है Put Option
पुट ऑप्शन एक शेयर बेचने का हक देता है। पुट खरीदने का मतलब मंदी करना होता है।
कब खरीदते हैं कॉल ऑप्शन
बड़ी तेजी की उम्मीद पर रिस्क कम रखने के लिए कॉल ऑप्शन लेते हैं। कॉल खरीदने में मुनाफा असीमित और नुकसान सीमित होता है।
कब लेते हैं पुट ऑप्शन
बड़ी गिरावट की आशंका पर रिस्क कम रखने के लिए पुट ऑप्शन लेते हैं। पुट खरीदने में मुनाफा असीमित, नुकसान सीमित होता है। ऑप्शन खरीदने में आपका नुकसान सिर्फ चुकाए गए प्रीमियम का होता है।
आईटीएम कॉल क्या है?
आईटीएम का मतलब है इन द मनी। स्पॉट भाव के नीचे की स्ट्राइक वाली कॉल को आईटीएम कहते हैं। स्पॉट 10800 पर तो इसके नीचे की कॉल आईटीएम होगी।
एटीएम कॉल क्या है?
एटीएम का मतलब है एट द मनी। स्पॉट भाव के करीब की स्ट्राइक वाली कॉल एटीएम होती है। स्पॉट 10800 पर तो 10800 कॉल एटीएम होगी।
ओटीएम कॉल क्या है?
ओटीएम कॉल क्या है?
ओटीएम का मतलब है आउट ऑफ द मनी। स्पॉट भाव के ऊपर की स्ट्राइक वाली कॉल आउट ऑफ द मनी होती है। स्पॉट 10800 पर हो तो इसके ऊपर की कॉल ओटीएम होगी।
आईटीएम पुट क्या है?
आईटीएम का मतलब इन द मनी होता है। स्पॉट भाव के ऊपर की स्ट्राइक वाली पुट आईटीएम होती है। अगर स्पॉट 10800 पर है तो 10800 के उपर की पुट आईटीएम होगी।
एटीएम पुट क्या है?
एटीएम पुट क्या है?
एटीएम का मतलब एट द मनी होता है। स्पॉट भाव के करीब की स्ट्राइक वाली पुट एटीएम होती है। स्पॉट 10800 पर हो तो 10800 का पुट एटीएम होगा।
ओटीएम पुट क्या है?
ओटीएम पुट क्या है?
ओटीएम का मतलब है आउट ऑफ द मनी। स्पॉट भाव के नीचे की स्ट्राइक वाली पुट ओटीएम होती है। स्पॉट 10800 पर तो इसके नीचे की पुट ओटीएम होगी। इंट्रिसिक वैल्यू+टाइम वैल्यू ही ऑप्शंस प्रीमियम होता है।
ऑप्शन कब बेचते हैं
कॉल और पुट खरीदने के साथ बेचा भी जा सकता है। ये शेयर की तेजी या गिरावट का फायदा उठाने का अच्छा विकल्प है। शेयर के अलावा इंडेक्स ऑप्शन भी बेच सकते हैं। ऑप्शन बेचने में घाटा असीमित और मुनाफा सीमित होता है।
कब करें पुट राइटिंग
शेयर का अच्छा बेस बनने के बाद पुट राइटिंग का विकल्प खुलता है। शेयर के बेस बनाने पर बेस स्ट्राइक को बेचा जाता है। इसमें नुकसान असीमित और मुनाफा सीमित होता है और मार्जिन पूरे कॉन्ट्रैक्ट साइज का लगता है।
कॉल-पुट कब बेचते हैं
कॉल-पुट बेचने को एक साथ बेचने को शॉर्ट स्ट्रेंगल कहते हैं। शेयर के रेंज में रहने पर दोनों एक साथ बेचे जाते हैं। बेचने से पहले तय करें रेंज छोटी है या बड़ी। छोटी रेंज में एट द मनी कॉल, एट द मनी पुट बेचते हैं। बड़ी रेंज पर ऑउट ऑफ मनी कॉल, ऑउट ऑफ मनी पुट बेचते हैं। रेंज 4-10 दिन कायम रहे तो मुनाफा होता है।
(मनी कण्ट्रोल.कॉम से साभार)
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