यदि आप सीधे शेयर मार्केट में पैसा न डाल कर mutual fund म्यूचुअल फंड (एमएफ) की किसी स्कीम में निवेश करना चाह रहे हैं ? अगर हां तो पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि म्यूचुअल फंड कितनी तरह के होते हैं.
आपको अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से सही म्यूचुअल फंड को चुनना चाहिए. आइए म्यूचुअल फंड की इन स्कीम के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.
संरचना और अवधि के हिसाब से MF कितने तरह के होते हैं ?
संरचना के हिसाब से म्यूचुअल फंड तीन तरह के होते हैं:
आपको अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से सही म्यूचुअल फंड को चुनना चाहिए. आइए म्यूचुअल फंड की इन स्कीम के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.
संरचना और अवधि के हिसाब से MF कितने तरह के होते हैं ?
संरचना के हिसाब से म्यूचुअल फंड तीन तरह के होते हैं:
1.ओपन एंडेड स्कीम
आप इस तरह की म्यूचुअल फंड स्कीम में किसी भी वक्त निवेश कर सकते हैं. ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश को किसी समय भुनाया जा सकता है. इस स्कीम की NAV (नेट एसेट वैल्यू) पर ही इसे खरीदा-बेचा जा सकता है. इस तरह की MF स्कीम में निवेश करने पर आपको अलग से चार्ज देना पड़ता है.
2.क्लोज्ड एंडेड स्कीम
कई बार म्यूचुअल फंड कंपनियां क्लोज्ड एंडेड स्कीम लांच करती हैं. इस तरह की MF स्कीम में आप निर्धारित अवधि में ही निवेश कर सकते हैं. अगर आप क्लोज्ड एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं तो आप इसे मैच्योरिटी के बाद ही भुना सकते हैं.3. इंटरवल स्कीम
म्यूचुअल फंड की इस तरह की स्कीम फंड प्रबंधन की अवधि में दोबारा खरीदी जा सकती है. वास्तव में इंटरवल स्कीम में ओपन और क्लोज्ड एंडेड, दोनों स्कीम की सुविधा होती है.म्यूच्यूअल फंड द्वारा इकट्ठा की गई राशि कहां निवेश की जा रही है, इस आधार पर म्यूचअल फंड को 7 प्रकार के फंड्स में वर्गीकृत कर सकते हैं. इनके बारे में अधिक जानकारी इस तरह है :-
1. इक्विटी या ग्रोथ फंड -
ऐसे म्यूचअल फंड में निवेशकों का पैसा शेयर बाजार में डाला जाता है. इसमें लार्जकेप मिडकेप, स्मॉलकेप, ELSS, इंडेक्स फंड आदि प्रकार के इक्विटी फंड होते हैं. ऐसे म्यूचअल फंड में लगाया निवेश शेयर बाजार की चाल के हिसाब से निवेशकों को रिटर्न देता है. जाहिर है इस फंड में रिस्क बहुत है साथ ही ज्यादा लाभ होने के अवसर भी हैं.
2. फिक्स्ड इनकम या डेब्ट फंड -
ऐसे म्यूच्यूअल फंड सरकारी सेक्युरिटिस, बांड, डिबेंचर में राशि निवेश करते हैं. इन फंड्स में रिस्क न के बराबर होता है. इनसे प्राप्त होने वाला रिटर्न निश्चित होता है जैसे बैंक की एफडी.
3. हाइब्रिड फंड -
ऐसे फंड फिक्स्ड इनकम फंड व इक्विटी फंड दोनों को मिलाकर बनाये जाते हैं। अर्थात कुछ पैसा इक्विटी में लगाया जाता है और कुछ पैसा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है ताकि निवेशकों को जोखिम कम और लाभ ज्यादा मिले. आम तौर पर हायब्रिड फंड इक्विटी में कम निवेश करते है . हायब्रिड फंड वरिष्ठ नागरिकों व रिटायर्ड लोगों के लिए बहुत उपयुक्त हैं.
4. मनी मार्केट या लिक्विड फंड-
ऐसे फंड अपना पैसा बहुत कम अवधि वाले सरकारी इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते है. ऐसे व्यक्ति जिनको छोटी अवधि के लिए अपना पैसा सुरक्षित रखते हुए कहीं निवेश करना है, इन फंड्स में निवेश करते हैं,.
5. बैलेंस्ड फंड-
ऐसे फंड इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करते हैं. ऐसे फंड्स का उद्देश्य निवेशकों को कम जोखिम के साथ अधिक रिटर्न देना होता है. ये फंड्स उन लोगों के लिए ठीक हैं जो शेयर बाजार में सीधे निवेश करने से डरते हैं लेकिन डेट की अपेक्षा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं.
6. गिल्ट फंड-
ये फंड्स अपनी पूरी राशि सरकारी प्रतिभूतियों में लगाते है. ऐसे लोग जो बिल्कुल रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, इनमें निवेश करते हैं.
7. आर्बिट्रेज फंड-
ऐसे फंड्स अपनी राशि का 60 से 65 % भाग शेयर बाजार में लगाते हैं. ऐसे फंड्स में निवेश की गई राशि सुरक्षित तो रहती है लेकिन रिटर्न कम-ज्यादा होता रहता है.
ऐसे फंड्स को समझने हेतु आर्बिट्रेज क्या होता है,जानना जरूरी है.
मान लें किसी कम्पनी के शेयर का भाव कैश बाजार में 100 रुपये है,वहीं उसी शेयर का भाव डेरिवेटिव बाजार में, जहां भविष्य के लिए सौदे होते हैं 105 रुपये है. इन दोनों बाजार में एक शेयर के भाव मे अंतर 5 रुपये है. आर्बिट्रेज फंड ऐसे शेयर्स में निवेश करके लाभ कमाते हैं.
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